कटेहरी ब्लॉक की गौशाला में मीडिया पड़ताल के दौरान सामने आई तस्वीर, गोवंशों की घटती संख्या और देखरेख पर भी उठे सवाल
ग्राम प्रधान की मौत के बाद सहायक खंड विकास अधिकारी दुर्गा प्रसाद पांडेय प्रशासक के रूप में संभाल रहे जिम्मेदारी, अधिकारियों से नहीं हो सका संपर्क

अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से गोवंशों के संरक्षण और गौशालाओं में बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। गोवंशों के लिए हरा चारा, पशु आहार, साफ-सफाई और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर है। इसके बावजूद जिले की कुछ गौशालाओं में व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कटेहरी विकासखंड के रानीपुर मोहन स्थित गौशाला में मीडिया पड़ताल के दौरान गोवंशों को बिना मशीन से काटे ही हरा चारा खिलाते हुए देखा गया। इससे चारा प्रबंधन और गौशाला की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मीडिया पड़ताल के दौरान गौशाला में गोवंशों के खाने के लिए हरा चारा (चरी) बिना मशीन से काटे खुले मैदान में डाला गया था। गोवंश उसी चारे को खाते दिखाई दिए। इस संबंध में वहां मौजूद महिला कर्मचारी से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि चारा केवल आज ही बिना काटे दिया गया है, जबकि सामान्य दिनों में मशीन से काटकर पशुओं को खिलाया जाता है।
हालांकि, सूत्रों का दावा है कि गौशाला में लंबे समय से गोवंशों को बिना काटे ही हरा चारा दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चारा खिलाने की व्यवस्था की नियमित निगरानी की जा रही है? यदि यह केवल एक दिन की स्थिति थी, तो इसकी वजह क्या रही? वहीं, यदि ऐसा लंबे समय से हो रहा है, तो संबंधित जिम्मेदारों ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रानीपुर मोहन ग्राम सभा के प्रधान की सड़क दुर्घटना में मौत होने के बाद ग्राम पंचायत की प्रशासनिक जिम्मेदारी सहायक खंड विकास अधिकारी दुर्गा प्रसाद पांडेय प्रशासक के रूप में संभाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, उनके साथ सचिन भी गांव के विकास कार्यों से संबंधित जिम्मेदारियों के निर्वहन में जुड़े हैं। ऐसे में ग्राम पंचायत के अंतर्गत संचालित गौशाला की व्यवस्थाओं, चारा प्रबंधन और गोवंशों की देखरेख की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, गौशाला में सामने आई स्थिति के संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
गौशाला में नर और मादा दोनों गोवंश रखे जाने के बावजूद उनकी संख्या बढ़ने के बजाय कम होने की बात भी चिंता का विषय है। हालांकि, रानीपुर मोहन गौशाला में गोवंशों की संख्या में कमी की वास्तविक स्थिति और उसके कारणों की पुष्टि अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके लिए गोवंशों की वर्तमान संख्या, आवक-जावक, स्थानांतरण और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड का मिलान आवश्यक है।
सवाल यह भी है कि गौशाला में पशुओं को निर्धारित मात्रा में हरा चारा और पशु आहार मिल रहा है या नहीं तथा उनकी सेहत की नियमित जांच की जा रही है या नहीं। संबंधित विभाग की जांच से ही व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इस मामले में पक्ष जानने के लिए खंड विकास अधिकारी जगन्नाथ चौधरी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। सहायक खंड विकास अधिकारी दुर्गा प्रसाद पांडेय से भी बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। मुख्य विकास अधिकारी वैभव मिश्रा से भी पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, मगर उनका फोन भी रिसीव नहीं हुआ।
गोवंश संरक्षण के लिए सरकार की ओर से की जा रही व्यवस्थाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब उनका धरातल पर प्रभावी ढंग से पालन हो। रानीपुर मोहन गौशाला में सामने आई तस्वीरों के बाद चारा प्रबंधन, गोवंशों की संख्या और देखरेख की व्यवस्था की जांच जरूरी है। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर जांच कराते हैं या नहीं और गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कार्रवाई होती है।




