प्री-पीएचडी कोर्स वर्क 2024 का भव्य शुभारंभ

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जलालपुर अंबेडकर नगर।
बाबा बरुआदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, परुइया आश्रम में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के प्री-पीएचडी कोर्सवर्क 2024 का शुभारंभ समारोह पूर्वक किया गया। इतिहास विषय के शोधपूर्व कोर्सवर्क के समन्वयक प्रो. के.के. मिश्र के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में इतिहास विभाग के नवागत शोध-छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के आचार्य प्रो. (डॉ.) राजेश कुमार सिंह ने शोध प्रविधियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने शोधार्थियों को प्राथमिक स्रोतों के महत्व और ऐतिहासिक तथ्यों के निष्पक्ष विश्लेषण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक सफल शोधार्थी बनने के लिए गहन अध्ययन, धैर्य और सत्यनिष्ठा आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक शोध प्रविधियों, जैसे पुरातात्विक उत्खनन, अभिलेखीय अध्ययन और मौखिक इतिहास के बारे में भी जानकारी दी।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. परेश कुमार पाण्डेय ने शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि शोध कार्य ज्ञान के नए क्षितिज खोलने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने महाविद्यालय में शोध को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उप प्राचार्य प्रो. पवन कुमार गुप्त ने कहा कि शोधार्थियों को अपने शोध में नवीनता और मौलिकता लाने का प्रयास करना चाहिए। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. रमेश कुमार ने शोधार्थियों को शोध के दौरान आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया। मुख्य नियंत्रक डॉ. कुलदीप सिंह ने शोधार्थियों को समय प्रबंधन और अनुशासन के महत्व के बारे में बताया।


कार्यक्रम के समन्वयक एवं महाविद्यालय के निवर्तमान प्राचार्य प्रो. के.के. मिश्र ने शोध नैतिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि द्वितीयक स्रोतों की अपेक्षा प्राथमिक स्रोतों का प्रमाण अधिक होता है। उन्होंने वाल्मीकि रामायण को तुलसीकृत मानस की तुलना में अधिक प्रामाणिक प्राथमिक स्रोत बताया। उन्होंने शोधार्थियों को मानसिकतावाद से बचते हुए निरपेक्ष रहने की सलाह दी।


कार्यक्रम का संचालन डॉ. सत्य प्रकाश पाण्डेय ने किया। छायाङ्कन अनिल केशरी ने किया।
इसी समारोह में ही उत्तरप्रदेश शासन के अभियान “पढ़े महाविद्यालय / बढ़े महा विद्यालय ” अभियान के तहत पुस्तक अध्ययन सत्र भी चलाया गया एवं “दहेज मुक्त भारत तथा नशा मुक्त भारत” अभियान के तहत सभी को दहेज प्रथा के उन्मूलन तथा नशा से मुक्ति से सम्बन्धित शपथ भी दिलायी गयी।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।


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