महरुआ उपकेंद्र से जुड़े अधिकारियों पर नलकूप कनेक्शन के नाम पर अवैध वसूली और बड़े घोटाले का आरोप
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकर नगर। विद्युत वितरण मंडल अकबरपुर के अंतर्गत संचालित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र महरुआ में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब “घूसपावर” ही नए कनेक्शन का आधार बन गया है। नलकूप कनेक्शन के नाम पर घरेलू और व्यावसायिक उपयोग के लिए कनेक्शन जारी करने का बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिसमें अधिशासी अभियंता अनिल कुमार बाल्मीकि, टीजीटू रवि कुमार और संविदा कर्मी संजय कुमार श्रीवास्तव का नाम सामने आया है।

शिकायती पत्र के अनुसार, विभागीय नियमों को दरकिनार कर, तकनीकी प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए मनचाहे उपभोक्ताओं को 20 से 30 हजार रुपये लेकर कनेक्शन दे दिए गए। इस खेल में कई ग्राम सभाएं शामिल हैं, जहां ट्रांसफार्मर की क्षमता से कई गुना अधिक भार जोड़कर विभागीय सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां उड़ाई गई हैं।
ग्राम कटेरिया बड़ागांव में 63 केवी के एक ट्रांसफार्मर से चार से अधिक घरों की घरेलू लाइटें जल रही हैं। रामपुर निवासी हरिराम को उसी ट्रांसफार्मर से कनेक्शन दिया गया, जिस पर पहले से 50 उपभोक्ता जुड़े हैं। ककड़ा, समसीपुर, दादूपुर, मानीकपुर, टोटरहिया, जरियारी, नरहरपुर, सेमरी आदि ग्रामों में भी फर्जीवाड़ा इसी तरह सामने आया है।
कई उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्होंने पहले से घरेलू कनेक्शन ले रखा था, लेकिन नलकूप कनेक्शन का लाभ उठाने के लिए अफसरों की जेब गरम कर दी।
शिकायती पत्र में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि उपकेंद्र से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी निजी ‘रेट लिस्ट’ बना रखी थी, जिसके अनुसार पैसे देने वाले को बिना जांच, बिना सर्वे और बिना प्रक्रिया के कनेक्शन दे दिए जाते थे। कई जगह तो पुराने ट्रांसफार्मर हटाकर नए तक लगवा दिए गए।
विभाग को करोड़ों का नुकसान, जिम्मेदार बेखौफ
न सिर्फ विभागीय राजस्व को नुकसान हुआ, बल्कि यह खेल सुरक्षा के लिहाज़ से भी खतरे से खाली नहीं है। ट्रांसफार्मर पर ओवरलोडिंग के कारण भविष्य में शॉर्ट सर्किट, आगजनी और जान-माल की क्षति की आशंका भी जताई जा रही है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने प्रमुख अभियंता अयोध्या क्षेत्र, प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लखनऊ और पावर कारपोरेशन लखनऊ के अध्यक्ष को पत्र भेजकर मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। यदि यह जांच ईमानदारी से कराई गई, तो बिजली विभाग का यह घूसपावर कनेक्शन घोटाला पूरे प्रदेश को झकझोर सकता है।





