नौ नियुक्तियों में गड़बड़ी, दोहरी नौकरी, फर्जी दस्तावेज़—शिकायत पर भी कार्रवाई ठप
अवधी खबर संवाददाता
अयोध्या।
रामबली नेशनल इंटर कॉलेज, गोसाईगंज में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बिछा है, जिसे तोड़ने की हिम्मत जिम्मेदार अफसर नहीं दिखा रहे। महोबा के ग्राम अलीपुरा निवासी कामता प्रसाद ने शपथपत्र देकर शासन से नौ बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं की जांच की मांग की, लेकिन महीनों बाद भी न जांच पूरी हुई, न दोषी सज़ा के घेरे में आए।
आरोपों का बिंदुवार चार्जशीट
दोहरी नौकरी और दोहरा वेतन: सरोज कुमार द्विवेदी ने कॉलेज और कुष्ठ नियंत्रण इकाई बीकापुर दोनों जगह से वेतन लिया।
फर्जी पहचान का खेल: एन.के. सिंह और नंद कुमार सिंह एक ही व्यक्ति को दो नामों से दर्ज कर फर्जी नियुक्ति।
दस्तावेज़ में हेराफेरी: विरेन्द्र कुमार शुक्ल की नियुक्ति में अंकपत्रों में गड़बड़ी।
बिना पद के भर्ती: उर्दू प्रवक्ता का पद ही नहीं, फिर भी शरीफ हैदर रिजवी की नियुक्ति।
योग्यता अधूरी: राजेश तिवारी को 1999 में हिंदी प्रवक्ता बनाया, जबकि जरूरी योग्यता 2003 में पूरी हुई।
रिक्त पद से पहले नियुक्ति:
ज्ञानदेव की 1995 में नियुक्ति, जबकि पद 1998 में खाली हुआ।ज्ञान देव का अधियाचन विज्ञापन प्रस्ताव भी नहीं था।
पदोन्नति से पहले पद पर कब्जा: मनोपकानिका दूबे की 1998 में नियुक्ति, जबकि पद 2003 में रिक्त हुआ।
विषय-पद में असंगति:
सुमन तिवारी की नियुक्ति विषय के अनुरूप नहीं। पद खाली नहीं, फिर भी भर्ती: सार्जन तिवारी की नियुक्ति 2000 में, जबकि पद खाली नहीं था।
अफसरों की चुप्पी पर उठते सवाल
मामला सतर्कता, शिक्षा विभाग और मंडल के अफसरों तक पहुंच चुका है। दस्तावेज़ और प्रमाण होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं ‘सिस्टम’ दोषियों को बचा रहा है।
शिकायतकर्ता का अल्टीमेटम
कामता प्रसाद का कहना है कि अगर शासन और विभाग ने अब भी निष्पक्ष जांच नहीं कराई, तो वे सीधे न्यायालय जाएंगे। “अगर जनता के भरोसे को यूं ही रौंदा गया, तो अफसर और दोषी—दोनों कटघरे में होंगे,उन्होंने चेताया।





