कड़ाके की ठंड में जहां स्कूल-कॉलेज बंद, वहीं रामनगर सीएचसी में मरीज और तीमारदार बेहाल

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अलाव व बैठने की व्यवस्था नदारद, 24 घंटे इमरजेंसी सेवा पर भी उठे सवाल

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर।
जनपद में कड़ाके की ठंड को देखते हुए जहां प्रशासन ने बच्चों को राहत देते हुए स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए हैं, वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) रामनगर में इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके परिजन भीषण ठंड में परेशान नजर आ रहे हैं।

सीएचसी रामनगर में ठंड से बचाव के लिए अलाव की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है। दूर-दराज के गांवों से इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों को रात के समय ठंड से बचने के लिए मजबूरन अस्पताल परिसर में लगे हरे पेड़ों की डालियां तोड़कर अलाव जलाना पड़ रहा है, जो न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है।

डिलीवरी कराने आए परिजन खुले आसमान के नीचे

अस्पताल में डिलीवरी के लिए आई महिलाओं के परिजनों के बैठने या ठहरने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। इस भीषण ठंड में उन्हें पूरी रात खुले में बितानी पड़ती है। परिजनों का कहना है कि वे मरीज की सेवा के लिए अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां खुद बीमार पड़ने की नौबत आ जाती है। ठंड के कारण कई तीमारदार सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित हो रहे हैं।

24 घंटे इमरजेंसी सेवा सिर्फ बोर्ड तक सीमित?

अस्पताल आए कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि रात करीब 9:30 बजे अस्पताल का गेट बंद कर दिया जाता है, जबकि अस्पताल परिसर में साफ-साफ लिखा है कि इमरजेंसी सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं।
परिजनों का कहना है कि जब तक हंगामा या शोर न किया जाए, तब तक इलाज शुरू नहीं होता, और यदि कोई आवाज नहीं उठाए तो मरीज को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

डॉक्टर का दावा बनाम जमीनी हकीकत

वहीं अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से अलाव की व्यवस्था की गई है और उसे जलाया भी गया है।
लेकिन मौके पर मौजूद मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अलाव कहीं नजर नहीं आता, और ठंड से बचने के लिए वे खुद पेड़ों की डालियां तोड़कर आग जलाने को मजबूर हैं।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था

अब बड़ा सवाल यह है कि डॉक्टर का दावा सही है या मौके पर मौजूद लोगों के प्रत्यक्ष साक्ष्य? अगर अलाव और अन्य सुविधाएं वास्तव में मौजूद हैं, तो फिर मरीजों और उनके परिजनों को इस अमानवीय स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

कुल मिलाकर, ठंड के इस प्रकोप में जहां एक ओर सरकार बच्चों की सेहत को लेकर सतर्क है, वहीं दूसरी ओर रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज और उनके परिजन बदहाली झेलने को मजबूर हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


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