ईंधन महंगाई व कर सुधारों पर चुप्पी, छोटे निवेशकों पर बढ़ा बोझ
अवधी खबर संवाददाता
लखनऊ। केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए आम बजट से देश के व्यापारी, किसान और उद्योगपति खासे निराश नजर आ रहे हैं। बजट में बढ़ती महंगाई, विशेषकर डीजल, पेट्रोल और एलपीजी गैस को एक बार फिर जीएसटी के दायरे से बाहर रखकर नजरअंदाज किया गया है। डबल इंजन सरकार होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल न होने से कारोबारी वर्ग में असंतोष है।
छोटे व्यापारियों को आज भी ऋण के लिए भटकना पड़ रहा है, जबकि इनकम टैक्स स्लैब में कोई उल्लेखनीय राहत नहीं दी गई। व्यापारियों और उद्योग समूहों से जुड़े कस्टम विवाद, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और टैक्स से जुड़े न्यायिक सुधारों की जरूरत अब भी बनी हुई है, लेकिन बजट में इस पर स्पष्ट रोडमैप नहीं दिखा।
बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि किए जाने से शेयर और डेरिवेटिव ट्रेडिंग छोटे निवेशकों के लिए और महंगी हो सकती है। वहीं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल पर शुल्क और लॉजिस्टिक लागत कम करने के उपाय भी अपर्याप्त रहे, जिससे निर्यातक संतुष्ट नहीं हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि रॉ मैटेरियल पर 18 प्रतिशत जीएसटी चुकाने के बाद तैयार माल पर केवल 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इस प्रक्रिया में लगभग 13 प्रतिशत राशि जीएसटी पोर्टल पर फंसी रह जाती है। उद्यमियों की मांग है कि केंद्र सरकार इस राशि के शीघ्र भुगतान का प्रावधान करे, ताकि पूंजी पोर्टल पर अटकी न रहे और सीधे व्यापार में उपयोग हो सके।




