अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। जिले के कोतवाली अकबरपुर क्षेत्र के मुरादाबाद मोहल्ले में चार बच्चों समेत मां के सनसनीखेज हत्याकांड का मुख्य आरोपी आमिर सोमवार को नेवतरिया बाईपास के पास पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के अनुसार, घेराबंदी के दौरान आरोपी ने फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह ढेर हो गया।
हालांकि आरोपी के मारे जाने के बाद भी इस दिल दहला देने वाली वारदात से जुड़े कई अहम सवाल अब भी अनसुलझे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग तेज हो गई है।
गौरतलब है कि 2 मई को एक घर के भीतर चार मासूम बच्चों (8 से 14 वर्ष) के शव खून से सने बिस्तर पर पाए गए थे। हत्या बेहद निर्ममता से की गई थी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। घटना के बाद बच्चों की मां गासिया खातून लापता थी, जिस पर शुरुआती शक भी जताया गया था।
लेकिन अगले दिन घर से करीब 100 मीटर दूर नाले के पास महिला का शव मिलने से मामला और उलझ गया। शरीर पर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या, आत्महत्या और साजिश तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान आमिर को मुख्य आरोपी के रूप में चिन्हित किया गया, जो पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुका था। लेकिन अब मुठभेड़ के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस जघन्य वारदात में सिर्फ एक ही आरोपी शामिल था या इसके पीछे कोई और भी साजिशकर्ता था। हत्या का मकसद क्या था, यह भी अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
पुलिस की माने तो आरोपी ने आत्मरक्षा में फायरिंग की थी, लेकिन स्वतंत्र गवाह, फोरेंसिक साक्ष्य और विस्तृत जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। आरोपी की मौत के चलते उससे पूछताछ भी संभव नहीं हो सकी, जिससे कई पहलुओं पर रहस्य बना हुआ है।
इस बीच, पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच, मैजिस्ट्रेट जांच और फोरेंसिक परीक्षण जरूरी है, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। जहां एक ओर आरोपी के मारे जाने से लोगों में कुछ हद तक राहत है, वहीं दूसरी ओर पूरे मामले की पारदर्शी जांच और सच्चाई उजागर करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। यह मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।




