अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। जहरीला पदार्थ खाने के बाद कक्षा 12 के छात्र की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले में न्यायालय के मुकदमा दर्ज करने के आदेश के बावजूद अभी तक पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अम्बेडकरनगर की अदालत ने 6 अगस्त 2026 को भीटी थानाध्यक्ष को मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना कराने का आदेश दिया था, लेकिन आदेश के बाद भी पुलिस की ओर से अभी तक मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है।
मामला भीटी थाना क्षेत्र के निवासी आर्यन निषाद की मौत से जुड़ा है। आर्यन अयोध्या जनपद के जाना बाजार स्थित एसडी मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12 का छात्र था। मृतक के पिता अमरजीत ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर विद्यालय के प्रधानाचार्य कौशल किशोर सिंह समेत संबंधित विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों पर बेटे को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने तथा अपमानित करने के गंभीर आरोप लगाए थे।
प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि प्रधानाचार्य द्वारा छात्र को कार्यालय में बुलाकर डांटा जाता था। इसके अलावा कक्षा अध्यापक शिखा मिश्रा, गुड्डू और भारती की मौजूदगी में भी उसे पढ़ाई में कमजोर होने, नशा करने और परीक्षा में फेल करने की धमकी दिए जाने का आरोप है। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि छात्र से कथित तौर पर ऐसी बातें कही गईं, जिससे वह मानसिक रूप से काफी आहत हुआ।
आवेदक के अनुसार, कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर आर्यन ने 9 जनवरी 2026 को जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसका उपचार कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस स्तर से कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए मृतक के पिता ने पुलिस अधीक्षक अम्बेडकरनगर को भी 23 मार्च 2026 को पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजने की बात न्यायालय में कही थी।
मामले में न्यायालय के निर्देश पर कराई गई प्रारंभिक जांच में विद्यालय स्टाफ द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोपों के संबंध में पुष्टिकारक साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद अदालत ने माना कि छात्र की मृत्यु जहरीला पदार्थ खाने से हुई थी और यह प्राकृतिक मृत्यु नहीं थी। न्यायालय के अनुसार मुकदमा दर्ज कर विस्तृत विवेचना किए जाने पर घटना के वास्तविक तथ्यों का पता लगाया जा सकता है और प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता प्रतीत होता है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप कुमार ने 6 अगस्त 2026 को आदेश जारी करते हुए भीटी थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि यदि मामले में पहले से मुकदमा पंजीकृत नहीं है तो आवेदक के कथनों के आधार पर उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार विवेचना कराई जाए। साथ ही एफआईआर की प्रति एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में भेजने का निर्देश भी दिया गया।
लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद भी अभी तक भीटी पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया है। इससे मृतक के परिजनों में नाराजगी है और वे पुलिस की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मामले में विद्यालय प्रधानाचार्य और शिक्षकों पर लगाए गए आरोप अभी आरोप मात्र हैं। इनकी वास्तविकता पुलिस विवेचना और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।




