सुरवार खुर्द के राजस्व गांव बन्नी में कूड़े का पहाड़, सफाई व्यवस्था चरमराई

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ग्राम प्रधान–सफाई कर्मी गठजोड़ पर ग्रामीणों के गंभीर आरोप, प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में

बस्ती। रुधौली विकासखंड के ग्राम पंचायत सुरवार खुर्द के राजस्व गांव बन्नी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। गांव में हर तरफ कूड़ा-कर्कट, नालियों में जमी सिल्ट और सड़ांध के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से गांव में नियमित सफाई नहीं हो रही है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा गंभीर रूप ले रहा है।

सफाई कर्मी ड्यूटी से नदारद, प्रधान पर संरक्षण का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मी संतोष कुमार प्रधान महीनों से अपनी ड्यूटी पर नहीं आते। बताया जा रहा है कि सफाई कर्मी ग्राम प्रधान की कथित मिलीभगत से बिना काम किए वेतन उठाते हैं। गांव में रोज़मर्रा की सफाई की जगह महीने में सिर्फ एक-दो बार दिहाड़ी मजदूरों को बुलाकर औपचारिक सफाई कराई जाती है, जो वास्तविक गंदगी पर कोई असर नहीं डालती।

गांव में रहने वाले लोगों ने बताया कि वर्षों से एक ही ग्राम पंचायत में तैनाती होने तथा गांव से केवल दो किलोमीटर की दूरी पर निवास करने के बावजूद सफाई कर्मी का गांव में न आना प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है।

पहले भी आई थीं खबरें, पर सुधार नहीं—अधिकारी चुप क्यों?

ग्रामीणों का कहना है कि इस मुद्दे पर कई बार खबरें प्रकाशित हुईं, जनप्रतिनिधियों तक शिकायतें पहुंचीं, लेकिन न ग्राम प्रधान ने सुध लिया और न प्रशासन ने कार्यवाही की। ग्राम प्रधान पर यह भी आरोप है कि वह सफाई कर्मी को जवाबदेह बनाने के बजाय उसे संरक्षण देते हैं, जिससे गांव की सफाई व्यवस्था फाइलों में तो सक्रिय दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

ग्रामीणों ने पूछा कि आखिर वर्षों से एक ही सफाई कर्मी एक ही जगह कैसे जमे हुए हैं? क्या सहायक विकास अधिकारी की मंशा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक नहीं है?

जहां एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च कर गांवों को स्वच्छ बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर बन्नी गांव की बदहाली इस योजना की जमीनी असलियत सामने ला रही है। नेताओं के प्रतीकात्मक फोटो-ऑप और झाड़ू चलाने वाली रस्म के बावजूद गांव गंदगी में डूबा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है.

ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान की मनमानी और सफाई कर्मी को लेकर ढिलाई ने सफाई व्यवस्था को पूरी तरह पंगु बना दिया है। लोगों का आरोप है कि प्रधान की ‘विशेष कृपा’ के कारण सफाई कर्मी गांव आए बिना ही वेतन ले रहे हैं, और शिकायत करने वाले ग्रामीणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इस पूरे मामले पर जब सहायक विकास अधिकारी रमेश चंद्र यादव से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि
“मामले की जांच कराई जा रही है, दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के दावे पहले भी कई बार किए गए, लेकिन नतीजा आज तक शून्य ही रहा।


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